रामायण की कहानी, अरण्यकाण्ड भाग 3 | ramayan ki kahani aranyakand.

रामायण की कहानी अरण्यकाण्ड भाग 3 हिंदी मे |

नमस्कार दोस्तो कल हमने रामायण का अयोध्या काण्ड के बारेमे आपको बताया | अयोध्या काण्ड मे श्रीराम जी के विवाह से लेकर वनवास जाने तक का समावेश है |

अरण्यकाण्ड
अरण्यकाण्ड

आज हम अरण्यकाण्ड के बारेमे आपको जानकारी देंगे | सबसे पहले बालकाण्ड, उसके बाद अयोध्याकाण्ड और उसके आगे अरण्यकाण्ड |

अरण्यकाण्ड – 

प्रभु श्रीराम वनवास चले जाने के बाद चित्रकुट पर रहने लगे | वनवास भोगते समय अनेक ऋषि मुनि को मिले | प्रभु श्रीराम ने अनेक राक्षस का वध किया | और अनेक कार्य प्रभु श्रीराम के हाथो हुये थे |

राम, लक्ष्मण और माता सीता तीनो चित्रकुट मे भ्रमण करते और अपना दिनचर्या बिताते | राम जी के जीवन मे 14 साल का वनवास था | वनवास मे राम जी सुतीष्ण और अगस्त्य ऋषि को मिले | उन्होंने ऋषि की भेट लेकर उनका आशीर्वाद लिया और आगे प्रस्थान किया | प्रस्थान करते वक्त उनकी भेट शरभंग ऋषि से हो गयी | शरभंग ऋषि केवल श्री राम का आशीर्वाद लेने के लिये अपने कुटी मे रहते थे | जब काफि वर्ष के बाद आखिर उनकी भेट प्रभु श्रीराम से हो गयी प्रभु श्रीराम से भेट होने के बाद ऋषि शरभंग तृप्त हो गये |

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अरण्यकाण्ड –

ओ बस प्रभु श्रीराम को मिलने के लिये जीवित थे | श्री राम की भेट के बाद ऋषि शरभंग ने अपने शरीर को अग्नि से जला दिया |

राम भ्रमण करते वक्त उन्होंने जले हुये हड्डी और जले हुये शरीर मिले तब श्रीराम ने ऋषि मुनियों से पूछा की ये किसके हड्डी है | तो ऋषि मुनियों ने प्रभु श्रीराम से बताया की असुर राक्षस ने ऋषि मुनियों का वध किया और उनको काट दिया | ऋषि मुनियों की बाते सुनकर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता श्रीराम अतिशय दुखी हो गये | तभी श्रीराम ने उन राक्षसों का वध किया |

 

लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटी – 

प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण भ्रमण कर रहे थे तो ओ चित्रकुट से पंचवटी पोहचे और ओ पंचवटी पर भ्रमण कर रहे थे तभी लंकापति रावण की बहन सूर्पनखा ने उनको देखा | सूर्पनखा ने प्रभु श्रीराम से विवाह की बात करी लेकिन प्रभु श्रीराम ने सूर्पनखा को बोला की मे एक विवाहित पुरूष हु और मेरे साथ मेरी पत्नी है |

हा लेकिन मेरे साथ मेरा छोटा भाई भी है | आप उसे बोलो तभी

रामायण की कहानी, अयोध्याकाण्ड भाग 2 | ramayan ki kahani ayodhyakand.
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सूर्पनखा ने राम के भाई लक्ष्मण को भी विवाह के लिये बोला लेकिन लक्ष्मण भी विवाहित थे तो उन्होंने भी ना कहकर सूर्पनखा को अपने रास्ते से हट जाओ ये विनती करी | लेकिन सूर्पनखा रास्ते से नही हट रही थीं | और लक्ष्मण ने घुस्सा होकर लंकापति रावण की बहन सूर्पनखा की नाक काट डाली |

 

माता सीता का हरण – 

जब श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण ने लंकापति रावण की बहन

सूर्पनखा की नाक काट डाली | तब सूर्पनखा वहासे अपने घर लंका गयी और अपने भैया लंकापति रावण को बताता की मे पंचवटी जंगल मे भ्रमण कर रही थि तभी मुझे दो वनवासी दिखे और उनको देखकर मे मोहित हो गयी |

उसके बाद मैंने एक वनवासी को बोला मेरे साथ विवाह करोगे तो उसके बताया की मे विवाहित हु उसके बाद मैंने दूसरे वनवासी को विवाह संबंधित बोला तो उसके मेरी नाक काट डाली | ये बात सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसके श्रीराम के खिलाफ षडतंत्र रचना शुरू करा |

तब लंकापति रावण ने मारीच नाम के राक्षस को हिरण का रूप धारण करके श्रीराम के पत्नी सीता के पास जाने के लिए बोला | तभी मारीच राक्षस एक सुंदर हिरण का रूप लेकर पंचवटी मे विराजमान श्रीराम के पर्णकुटी के पास गया और सीता से जब उस सुंदर हिरण को देखा तब सीता ने प्रभु श्रीराम जी को कहा कि मुझे ओ हिरण अत्यंत सुंदर लगा और मुझे ओ हिरण चाहिये |

तब श्रीराम ओ हिरण के पीछे गये लेकिन प्रभु श्रीराम के हाथो उस मारीच नाम के राक्षस का वध हो गया | जब मारीच राक्षस की मृत्यू हुई तब मारीच राक्षस ने श्रीराम की आवाज मे लक्ष्मण को आवाज दि | जब लक्ष्मण जी ने मारीच राक्षस से निकली प्रभु श्रीराम की आवाज सुनी तभी लक्ष्मण चिंतित हो गये और सीता जी को कहा भाभी भैया किसी संकट पड़ गये है ऐसे संकेत लग रहे है | मे राम भैया को देखने के लिये जाता हु लेकिन आप पर्णकुटी से बाहर मत जाना और लक्ष्मण पर्णकुटी के बाहर लक्ष्मण रेषा खिचते है और सीता को इस रेषा का उलंघन ना करे ये बताकर राम के खोज मे चले जाते है |

तभी वहा लंकापति रावण अपना रूप बदलकर झोली लेकर सीता के पास गये और सीता से भिक्षा मांगी लेकिन रावण जब लक्ष्मण रेषा के पास गये तभी रावण के पैर जलने लगे | तभी रावण ने सीता को लक्ष्मण रेषा से बाहर आये और भिक्षा दिजीये ये बोला और सीता रावण को एक साधु समझकर लक्ष्मण रेषा से बाहर आके रावण को भिक्षा दी | तभी रावण ने सीता का हरण किया और सीता को आकाशमार्ग से ले जा रहे थे

रावण और जटायू का युद्ध – 

| तभी जटायू नामक गरुड़ ने रावण को रोखने कि कोशिश करी और रावण और जटायू का युद्ध हुआ और रावण ने जटायू के पंख काट दिये और जटायू ने अपने प्राण गमा दिये |

आज हमने रामायण अरण्यकाण्ड के बारेमे आपको बताया कल हम आपको अगला भाग किष्कींधाकाण्ड के बारेमे जानकारी देंगे |

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